क्रिकेट में टाई और ड्रॉ में क्या अंतर है? आसान भाषा में समझें

क्रिकेट के नियम कई बार थोड़े उलझे हुए लगते हैं। मैदान पर होने वाली हर स्थिति को क्रिकेट के नियम (Laws of Cricket) तय करते हैं। किसी मैच के कई संभावित नतीजों में से दो हैं टाई और ड्रॉ। इन दोनों ही नतीजों में किसी भी टीम को न जीत मिलती है, न हार। टाई किसी भी फॉर्मेट में हो सकता है, जबकि ड्रॉ सिर्फ टेस्ट क्रिकेट (और दूसरे मल्टी-डे मैचों) में होता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि क्रिकेट में टाई और ड्रॉ में क्या अंतर है।

टाई क्या होता है?

2011 वर्ल्ड कप में भारत और इंग्लैंड का मैच टाई रहा था
2011 वर्ल्ड कप में भारत बनाम इंग्लैंड का मुकाबला टाई पर खत्म हुआ था

टाई क्रिकेट मैच का एक संभावित नतीजा है। मैच जीतने के लिए दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को विरोधी टीम का स्कोर पार करना होता है, नहीं तो लक्ष्य बचाने वाली टीम जीत जाती है। लेकिन कई बार मैच के अंत में दोनों टीमों का स्कोर बिल्कुल बराबर रह जाता है। जब दोनों टीमों को अलग करने वाला कुछ नहीं बचता और स्कोर बराबर रहता है, उसे टाई कहते हैं।

टाई किसी भी फॉर्मेट में हो सकता है। T20 मैचों में टाई होने पर विजेता का फैसला सुपर ओवर से होता है। आईसीसी टूर्नामेंट के वनडे मैचों में भी अब यही नियम लागू है, जैसे 2019 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच हुआ था। सामान्य द्विपक्षीय वनडे और टेस्ट मैचों में नतीजा “टाई” ही घोषित किया जाता है। वनडे और T20 में टाई की संभावना टेस्ट क्रिकेट से कहीं ज्यादा होती है। पूरे क्रिकेट इतिहास में सिर्फ दो टेस्ट मैच टाई हुए हैं: पहला 1960 में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच, और दूसरा 1986 में चेपॉक (चेन्नई) में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच।

ड्रॉ क्या होता है?

ड्रॉ टेस्ट क्रिकेट का एक संभावित नतीजा है। जब पांच दिन का खेल पूरा होने के बाद भी कोई टीम नतीजा नहीं निकाल पाती, तो मैच ड्रॉ हो जाता है। उदाहरण के लिए, चौथी पारी में लक्ष्य का पीछा कर रही टीम न तो लक्ष्य हासिल कर पाती है और न ही ऑलआउट होती है, या गेंदबाजी करने वाली टीम पांचवें दिन के अंत तक विरोधी टीम को आउट नहीं कर पाती।

ड्रॉ का प्रावधान “टाइमलेस टेस्ट” यानी बिना समय सीमा वाले टेस्ट मैचों को खत्म करने के लिए लाया गया था। आधुनिक दौर में ड्रॉ टेस्ट धीरे-धीरे दुर्लभ होते जा रहे हैं। ज्यादातर टेस्ट मैच पांच दिन तक चलते ही नहीं, खासकर आज की पिचों और तेज रफ्तार बल्लेबाजी के चलते।

टाई और ड्रॉ में मुख्य अंतर

सबसे बड़ा अंतर यह है कि टाई तब होता है जब खेल पूरा होने पर दोनों टीमों का स्कोर बराबर हो, जबकि ड्रॉ तब होता है जब टेस्ट मैच में समय खत्म हो जाए और नतीजा न निकले। दोनों नतीजे एक साथ सिर्फ तब हो सकते हैं जब टेस्ट मैच की आखिरी गेंद पर स्कोर बराबर हो और बल्लेबाजी करने वाली टीम ऑलआउट न हुई हो। टेस्ट इतिहास में दो बार ऐसा हुआ है जब मैच बराबर स्कोर पर ड्रॉ रहा, जिनमें 2011 में मुंबई में खेला गया भारत बनाम वेस्टइंडीज टेस्ट भी शामिल है।

बिंदुटाईड्रॉ
कब होता हैखेल पूरा होने पर दोनों टीमों का स्कोर बराबरसमय खत्म, कोई नतीजा नहीं
फॉर्मेटटेस्ट, वनडे, T20 सभीसिर्फ टेस्ट / मल्टी-डे
आगे क्याT20 और आईसीसी वनडे में सुपर ओवरमैच वहीं खत्म
टेस्ट इतिहास मेंसिर्फ 2 बार (1960, 1986)सैकड़ों बार

अंग्रेजी में पढ़ें: Difference between Tie and Draw in Cricket